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अश्वगंधा के फायदे, नुकसान व सेवन कैसे करें | Ashwagandha Benefits in Hindi

अश्वगंधा का प्रयोग प्राचीन काल से ही कई प्रकार के रोगों का इलाज करने के लिए किया जाता है। यह एक तरह की जड़ी - बूटी है। सिर्फ इस एक जड़ी - बूटी में सेहत के बहुत से खजाने छुपे हुए है।

आगे आपको अश्वगंधा से जुड़ी सारी जानकारी जानने को मिलेगी।

अश्‍वगंधा क्या है? (What is Ashwagandha?)

अश्‍वगंधा आयुर्वेदिक औषधि है। जिसका प्रयोग विभिन्न तरह की बिमारियों का उपचार करने के लिए किया जाता है। हजारों वर्षों से इस औषधि का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस औषधि का तेल, चूर्ण और कैप्सूल बनाकर इसे इस्तेमाल में लिया जाता है।

अगर यह पहचान करना है की अश्‍वगंधा असली है तो इसे सूंघ कर पहचाना जा सकता है। जो असली अश्‍वगंधा होता है उसके पौधों को मसलते है तो उसमें घोड़े की पेशाब जैसी गंध आती है। अश्‍वगंधा का पौधा ३५ से ७५ सेमी की लम्बाई का होता है।

अनेक भाषाओं में अश्‍वगंधा के नाम (Ashwagandha Name in Different Languages)

अश्‍वगंधा का देश -विदेश में उपयोग किये जाने के कारण अलग -अलग भाषाओँ में इसके बहुत से नाम है।

अश्‍वगंधा का वानस्पतिक नाम विथेनिआ सॉम्नीफेरा है बाकी अन्य भाषाओँ में नाम यह है।

  • हिंदी – असगन्ध, अश्वगन्धा, पुनीर, नागोरी असगन्ध
  • संस्कृत – वराहकर्णी, वरदा, बलदा, कुष्ठगन्धिनी, अश्वगंधा
  • गुजराती– आसन्ध, घोडासोडा, असोड़ा
  • अंग्रेजी – विंटर चेरी, पॉयजनस गूज्बेर्री
  • बंगाली  – अश्वगन्धा
  • उर्दू – असगंधनागोरी
  • कन्नड़ – अमनगुरा, विरेमङड्लनागड्डी
  • ओरिया – असुंधमराठी – असकन्धा , टिल्लि
  • पंजाबी – असगंद
  • तमिल – चुवदिग, अमुक्किरा, अम्कुंग
  • नेपाली – अश्वगन्धा
  • तेलुगु– पैन्नेरुगड्डु, आंड्रा, अश्वगन्धी
  • मलयालम – अमुक्कुरम
  • फ़ारसी – मेहरनानबरारी , असगंध-ए-नागौरी
  • अरेबिक – तुख्मे हयात

अश्‍वगंधा के फायदे (Ashwagandha Benefits in Hindi)

अश्वगंधा शतावरी के फायदे तो अनगिनत है। उनमें से ही जानते है कुछ विशेष अश्वगंधा के फायदे हिंदी में

  • आँखों की रोशनी बढ़ाए - यदि आपकी आँखें कमजोर है और आँखों की ज्योति कम है तो अश्वगंधा के प्रयोग से आप आँखों की रोशनी बढ़ा सकते है।
  • लिवर रोगों में लाभकारी - इसमें एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पाए जाने के कारण यह लिवर की सूजन को दूर करता है। लिवर को नुकसान पहुँचाने वाले टॉक्सिन्स से रक्षा करता है।
  • ब्लड सेल्स बढ़ाता है - वाइट और रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाने में भी यह सहायक होता है। जिससे शरीर की गंभीर बीमारी में आराम मिलता है।
  • टीबी में लाभ - अगर आप टीबी की बीमारी से ग्रसित है तो अश्वगंधा का सेवन करने से आपको टीबी की बीमारी में लाभ मिलेगा
  • डायबिटीज को दूर करे - डायबिटीज को कण्ट्रोल करने के लिए इस औषधि का प्रयोग करना सर्वोत्तम माना जाता है।

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अश्वगंधा के नुकसान (Ashwagandha Side Effects)

इसके फायदे होने के साथ ही इसके कुछ दुष्प्रभाव भी है। यदि इसका सही मात्रा में सेवन ना किया जाये तो इसके नुकसान भी हो सकते है।

  • गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन नहीं करना चाहिए इससे गर्भपात होने का खतरा रहता है।
  • उचित मात्रा में सेवन ना करने की वजह से उल्टी और जी मचलाने की समस्या हो सकती है।
  • गर्म प्रकृति के लोगों को इसका सेवन करने से बचना चाहिए या डॉक्टर की सलाह लेकर अश्‍वगंधा का उपयोग किया जा सकता है।
  • ब्लड प्रेशर के मरीजों को अश्वगंधा का सेवन करने के पहले अपने चिकित्स्क से परामर्श कर लेना चाहिए क्योंकि लो बीपी वाले लोगों के लिए यह नुकसानदायक हो सकता है।


अश्‍वगंधा कहां पाया या उगाया जाता है (Where is Ashwagandha Found & Grown?)

इसके पौधे को वन में भी उगाया जा सकता है और खेती करके भी उगाया जा सकता है लेकिन, गुणवत्ता खेती करके उगाये जाने वाले अश्‍वगंधा की अच्छी होती है।

भारत की सुखी जगहों पर इसकी खेती की जाती है। इनमें शामिल है - मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और पंजाब। भारत में उगाने के साथ ही अश्‍वगंधा को नेपाल और चीन में भी उगाते है।

अश्वगंधा कितने दिन तक खाना चाहिए (For How Many Days Should You Eat Ashwagandha)

ठण्ड में 4 महीने तक अश्वगंधा की २ से ४ ग्राम मात्रा को सुबह-शाम खाया जा सकता है।

इस्तेमाल के लिए अश्‍वगंधा के उपयोगी हिस्से (Useful Parts of Ashwagandha)

इसके कुछ उपयोगी हिस्से जिनका इस्तेमाल किया जाता है।

यह है -

  • जड़
  • पत्‍ते
  • बीज
  • फल

अश्वगंधा लेने से पहले ध्यान रखने योग्य विशेष सावधानियां (Special Precautions and Warnings to Keep in Mind Before Taking Ashwagandha)

वैसे तो यह एक औषधि है लेकिन फिर भी इसका सेवन करने के पहले कुछ बातों से परिचित होना बेहतर है ताकि आप यह जान पाए की आपको क्या सावधानी रखनी है।

  • ज्यादा लम्बे समय तक इसका सेवन करने से बचे।
  • अगर किसी को आंत से संबंधित परेशानी है तो उन्हें इस औषधि से परहेज करना चाहिए।
  • यदि पेट से संबंधित कोई रोग आपको है तब अश्वगंधा से दुरी बनाये रखना ही उचित है।

अश्वगंधा की खुराक (Ashwagandha Dosage)

पहले आपको यह जानना होगा की कितनी मात्रा में इसका सेवन करना सही है। उसके बाद ही इस जड़ीबूटी को खाये। प्रत्येक व्यक्ति के लिए अश्वगंधा की खुराक भिन्न होती है। जो की उनकी उम्र, किसी तरह की शारीरिक बीमारी व सेहत के अनुसार ली जानी चाहिए।

तो जरुरी है आप अपने डॉक्टर से मशवरा ले और अगर आप बाजार में मिलने वाले अश्वगंधा सप्लीमेंट्स का उपयोग करते है तो उसके पैकेट पर जो निर्देश दिए होते है उनके अनुसार इसका सेवन करे।

अश्वगंधा और दूध पीने से क्या होता है?

नीचे बताई गई समस्याएं होने पर दूध के साथ अश्वगंधा का इस्तेमाल करना लाभदायक होता है।

  • हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए दूध में अश्वगंधा पाउडर मिलाकर पिने से लाभ होता है।
  • शरीर की कमजोरी और दुर्बलता दूर करने के लिए भी दूध के साथ इसका सेवन करना चाहिए।
  • पित्त की प्रकृति वाले व्यक्ति भी यदि अश्वगंधा को दूध में मिलाकर पीते है तो उन्हें इस समस्या से निजात मिलता है।
  • वीर्य विकार को दूर करने के लिए भी दूध के साथ इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • अच्छी और गहरी नींद के लिए अश्वगंधा का दूध के साथ सेवन करे।

अश्वगंधा का सेवन कैसे करें (How Much to Consume Ashwagandha)

इसका सेवन बहुत तरह से किया जा सकता है जैसे - शहद, पानी, घी या दूध में मिलाकर और अश्वगंधा की चाय, अश्वगंधा का रस व अश्वगंधा के कैप्सूल भी बाजार में मिलते है या ऑनलाइन भी खरीद कर इसका इस्तेमाल कर सकते है।



इस गुणकारी औषधि से मनुष्य कितने ही तरह के लाभ प्राप्त कर सकता है। बस आपको इसकी उचित मात्रा को ध्यान में रखकर इसका सेवन करना है। अश्वगंधा के उपयोग हिंदी में आपने जाने, साथ ही अश्वगंधारिष्ट के फायदे और नुकसान जानने के बाद इसका इस्तेमाल करने में आसानी होगी। इस जड़ीबूटी को मनुष्य के लिए प्रकृति का उपहार भी कहा जा सकता है।