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पुरुषों और महिलाओं के लिए शतावरी के फायदे - Benefits of Shatavari for Men and Women

वर्षों से आयुर्वेदिक जड़ी - बूटी का प्रयोग रोगों के रोकथाम करने के लिए किया जा रहा है। इन जड़ी बूटी में एक सबसे ख़ास है शतावरी। जो बिमारियों का इलाज करने में मददगार है। पुरुषों और महिलाओं के लिए यह बहुत फायदेमंद है, उन्हें इसके कई लाभ प्राप्त होते है।


शतावरी क्या है? - What Is Shatavari in Hindi?

शतावरी एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। जो हिमालयी क्षेत्रों में पायी जाती है। शतावरी को एस्पैरागस रेसमोसस भी कहते है। यह बेल या झाड़ के रूप में होती है इसकी लताएं झाड़ीदार होती है। जो की अच्छे से फैलने वाली होती है।

इसकी सिर्फ एक बेल के नीचे १०० से भी ज्यादा जड़े होती है। यह जड़े ३० से  १०० सेमी लम्बी और १ से २ सेमी मोटी होती हैं। शतावरी की जड़ों के दोनों सिरे नुकीले होते है। जड़ो पर भूरे रंग का छिलका होता है। छिलके को निकाल कर देखने पर अंदर दूध की तरह सफ़ेद जड़ जैसी होती है। आयुर्वेद में शतावरी को रसायन या होल बॉडी टॉनिक कहते है।

इसका स्वाद कड़वा और मीठा होता है। सब्जी के तौर पर भी इसे खाया जाता है। इसमें लो कैलोरी होती है जो कई शारीरिक फायदे प्रदान करने वाली होती है। वजन घटाना, महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने में साथ ही और भी तरह के फायदे मिलते है।

शतावरी दो प्रकार की होती हैं।

विरलकन्द शतावर : इस शतावर के कन्द छोटे होते है। जो फूले हुए, मांसल और गुच्छों में लगे होते हैं। इस कन्द का काढ़ा बनाया जाता है और इस काढ़े का सेवन किया जाता है।

कुन्तपत्रा शतावर : यह शतावर एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। इस शतावर के छोटे कन्द होते है जो मोटे होते है। फूलों का रंग सफ़ेद और फल गोल होते हैं। जब यह फल कच्ची अवस्था में होते है तब इनका रंग हरा होता है और पक जाने पर लाल रंग के हो जाते है।

अन्य भाषाओं में शतावरी के नाम - Name of Shatavari in Different Languages

शतावरी को पूरी दुनिया में अलग-अलग नामों से जानते है।

  • हिंदी - सतावर, सतावरि, सतमूली, शतावरी, सरनोई
  • अंग्रेजी - वाईल्ड एस्पैरागस
  • संस्कृत - शतावरी, शतपदी, शतमूली, महाशीता, नारायणी, काञ्चनकारिणी, पीवरी, सूक्ष्मपत्रिका, अतिरसा, भीरु, नारायणी, बहुसुता, बह्यत्रा, तालमूली, नेटिव एस्पैरागस
  • पर्शियन - शकाकुल
  • ओड़िया - चोत्तारु , मोहनोले
  • नेपाली - सतामूलि, कुरीलो
  • तमिल - किलावरि , पाणियीनाक्कु
  • मलयालम - शतावरि , शतावलि
  • बंगाली - शतमूली , सतमूली
  • मराठी - अश्वेल, शतावरी
  • पंजाबी - बोजान्दन, बोजीदान
  • तेलुगु - छल्लागडडा , एट्टावलुडुटीगे
  • अरेबिक - शकाकुल
  • गुजराती - एकलकान्ता , शतावरी
  • उर्दू - सतावरा

महिलाओं और पुरुषों के लिए शतावरी के फायदे - Benefits of Shatavari for Men and Women

शतावरी से निम्न स्वास्थ्य लाभ मिलते है। जानते है शतावरी खाने के फायदे के बारे में।

1) पुरुष प्रजनन प्रणाली के लिए शतावरी

यह पुरुषों के स्वास्थ्य में सुधार करने में फायदेमंद है। शतावरी पाउडर का उपयोग शक्तिशाली शुक्राणुजन्य को बढ़ावा करने में मदद करते है। जो ओलिगोस्पर्मिया (कम शुक्राणु संख्या), टेराटोस्पर्मिया (असामान्य शुक्राणु आकार), एस्थेनोज़ोस्पर्मिया (यानी शुक्राणु गतिशीलता), हाइपोस्पर्मिया (वीर्य की कम मात्रा) का उपचार करने के लिए बहुत ही उपयोगी है। यह एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है। जिसकी वजह से टेस्टोस्टेरोन और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन जो पुरुष हार्मोन होते है उनके उत्पादन में सुधार करता है।

2) महिला प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार

शतावरी का सबसे आम उपयोग महिला स्वास्थ्य लिए होता है। यह विशेष रूप से प्रजनन से संबंधित विकारों का इलाज करने में सहायक है। २०१८ की बायोमेडिसिन और फार्माकोथेरेपी में प्रकाशित हुए अध्ययनों के अनुसार,  संयंत्र हार्मोनल असंतुलन और पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम की समस्याओं में सुधार करने का कार्य करता है।

3) एंटीऑक्सीडेंट गुण

इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण मुक्त-कट्टरपंथी कोशिका क्षति को रोकते है। शतावरी में सैपोनिन की उच्च मात्रा होती है। सैपोनिन एंटीऑक्सीडेंट क्षमता वाले यौगिक होते हैं। यह तनाव से भी मुक्ति दिलाते है। तनाव बीमारी का कारण बनता है। २००४ में हुए अध्ययन में सामने आया की, शतावरी जड़ के अंदर रेसमोफुरन नामक एक नया एंटीऑक्सीडेंट मिला था।

4) सेक्सुअल पॉवर को बढ़ाने में

शतावरी के फायदे पुरुषों के लिए बहुत ही कमाल के होते है। कई पुरुष मर्दानगी ताकत की कमी और सेक्सुअल स्टेमना कम होने की वजह से परेशान रहते है। उन पुरुषों के लिए शतावरी का सेवन करना लाभकारी होता है। शतावर को पका लें और इसका दूध के साथ शतावरी चूर्ण का सेवन किया जा सकता है। शतावरी चूर्ण की खीर बना लें और इसे खाएं इससे सेक्सुअल स्टेमना में वृद्धि होती है।

5) रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने में

महिला प्रजनन स्थितियों के उपचार में इसका उपयोग करके अध्ययन किया गया। इसमें शतावरी के साथ ही हर्बल दवाओं का एक संयोजन दिया गया। इसमें सामने आया की यह रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम कर सकता है। २०१८ में भी एक अध्ययन ने ११७ महिलाओं में रजोनिवृत्ति के लक्षणों पर शतावरी का परीक्षण किया। इसमें शतावरी और तीन अन्य जड़ी-बूटियों को ३ महीने तक लेने के उपरान्त महिलाओं में रजोनिवृत्ति के लक्षणों में कमी आयी रात को पसीना आने की समस्या भी कम हुई।

6) अवसाद के इलाज में

आयुर्वेद में अवसाद का इलाज करने के लिए शतावरी का उपयोग बताया गया है। अमेरिका की चिंता और अवसाद संघ के अनुसार, अवसाद से ग्रस्त विकार से सालाना १६.१ मिलियन अमेरिकी वयस्क ग्रसित होते हैं, लेकिन नकारात्मक दुष्प्रभावों होने की वजह से प्रिस्क्रिप्शन डिप्रेशन की दवाएं नहीं लेते। शतावरी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट अवसादरोधी क्षमता वाले होते है।

7) गुर्दे की पथरी के इलाज में

गुर्दे की पथरी बहुत ही कष्टकारी होती है। यह गुर्दे में कठोर रूप में जमा होती है। जब वह मूत्र पथ से गुजरती है तो कष्टदायी दर्द होता है। ज्यादातर गुर्दे की पथरी ऑक्सालेट से बनी होती है। ऑक्सालेट मुख्यतः इन खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले एक तरह के यौगिक हैं :- चुकंदर, फ्रेंच फ्राइज़ और पालक। शतावरी जड़ के अर्क से मूत्र में मैग्नीशियम की एकाग्रता बढ़ती है। शरीर में मैग्नीशियम का अच्छा स्तर होने पर मूत्र में क्रिस्टल का विकास रुक जाता है। जो गुर्दे की पथरी बनाते हैं।

8) श्वसन संबंधी परेशानी में फायदा

सांस की तकलीफों का उपचार करने का शतावरी बहुत ही अचूक उपाय है। इसमें जो एंटी-बायोटिक, एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते है। वह सर्दी, खांसी और फ्लू के लक्षणों को कम कर उनका इलाज करता है। छाती और नाक गुहाओं के भीतर जमा कफ को भी पतला और ढीला करता है। जिससे सांस लेने में आसानी होती है। गले में जम रहे बलगम से छुटकारा भी मिलता है। अगर इस औषधि का नियमित सेवन किया जाए तो यह फेफड़ों के ऊतकों को मजबूत कर उन्हें स्वस्थ बनाता है। ब्रोंकाइटिस और दमा का भी इलाज करने में शतावरी फायदेमंद है।

9) कार्डियक फंक्शनिंग को बढ़ावा

शतावरी हृदय पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। यह एक कार्डियो-सुरक्षात्मक जड़ी बूटी है, जो कई तरह के हृदय रोगों के इलाज में सहायक है। इसका सेवन करने से मन शांत होता है और हृदय प्रणाली को आराम मिलता है। यह  अनियमित दिल की धड़कन और धड़कन से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही गुणकारी है। लिपिड संचय को रोकने, रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने का कार्य करती है। इससे रक्त के थक्कों का जोखिम, दिल के दौरे, दिल के ब्लॉक का जोखिम कम हो जाता है।

10) स्तनों के दूध में वृद्धि

शतावरी के फायदे महिलाओं के लिए बहुत ही लाभदायक है। बहुत सी माताओं को स्तनों में दूध की कमी होती है तो जिन महिलाओं को यह समस्या है वह शतावरी का सेवन इस तरह से करें। शतावरी की जड़ के चूर्ण की १० ग्राम मात्रा को दूध के साथ लें। आपके स्तनों के दूध में वृद्धि होगी। शतावरी की जड़ से बने पेस्ट का दूध के साथ सेवन करने से भी लाभ होता है। गाय के दूध में में शतावरी को पीसकर पिएं। इससे दूध स्वादिष्ट और पौष्टिक हो जाएगा।

11) गर्भवती महिलाओं को फायदा

गर्भवती महिलाओं को शतावरी का सेवन करना चाहिए। यह आपके शिशु के लिए बहुत फ़ायदेमंद है। शतावरी, मुलैठी, सोंठ, भृंगराज, अजगंधा को समान मात्रा में ले लीजिये और इन सबका महीन चूर्ण बना लें। इसकी १ से २ ग्राम मात्रा को बकरी के दूध के साथ लें इससे गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ होता है।

12) मूत्रवर्धक के रूप में

मूत्रवर्धक शरीर को अतिरिक्त तरल पदार्थ से मुक्ति दिलाते है यह उन लोगों के लिए होते हैं जिनके हृदय के आसपास से अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालने के लिए हृदय विफलता होती है। अध्ययन के अनुसार आयुर्वेद में

शतावरी को मूत्रवर्धक के रूप में उपयोग में लाया जाता है।

13) एंटी-एजिंग

यह एक सबसे अच्छा एंटी-एजिंग है। २०१५ में एक अध्ययन में पाया गया की शतावरी की जड़ में जो सैपोनिन होता है। वह मुक्त-कट्टरपंथी त्वचा की क्षति को कम करता है। जिससे झुर्रियाँ होती हैं। यह कोलेजन को टूटने से रोकता है। कोलेजन से त्वचा में लोच रहती है। यह उम्र बढ़ाने वाली औषधि है इससे उम्र का असर कम दिखाई देता है।

14) गैस्ट्रिक अल्सर में सुधार

गैस्ट्रिक अल्सर के इलाज के लिए शतावरी बहुत ही बेहतरीन औषधि है। एक अध्ययन ने संकेत दिया कि शतावरी ने अल्सर का इलाज किया। एक निष्कर्ष भी निकला की यह जड़ी बूटी रैनिटिडीन दवा जितनी ही प्रभावी थी। मनुष्यों में अल्सर के इलाज के लिए शतावरी का उपयोग किया जाता है।

14) कामेच्छा को बढ़ाने में

यह एक प्राकृतिक कामोत्तेजक है। इसके सेवन से मानसिक तनाव और चिंता में कमी होती है। पुरुषों और महिलाओं की कामेच्छा बढ़ाने के लिए हार्मोन को उत्तेजित करती है। पौरुषशक्ति और सहनशक्ति को भी बढ़ाने में भी लाभकारी है।

15) मधुमेह प्रबंधन में

शतावरी ब्लड में ग्लूकोज के स्तर को कम करती है। इसमें क्रोमियम मिनरल भरपूर होता है जो शरीर में ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है। इसमें हाइपोग्लाइकेमिक गुण शरीर के रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में बहुत ही कारगर है। शतावरी की जड़ के चूर्ण का सेवन किया जाये तो स्टार्च के ग्लूकोज में टूटने को कम करता है।

16) घाव और अल्सर का इलाज

शतावरी की जड़ों के एंटी-अल्सर गुण, एंटी इंफ्लेमेटरी गुण कई प्रकार के अल्सर जैसे : अल्सरेटिव कोलाइटिस, नासूर घावों, पेप्टिक अल्सर, मुंह के अल्सर आदि के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके पौधे में पाया जाने वाला बायोएक्टिव कंपोजिट ऊतक पुनर्जनन को प्रोत्साहित करते हैं और पत्तियों के रस का उपयोग घावों को भरने में होता है।

17) वजन घटाने में

जो लोग वजन घटाना चाहते है उन्हें इसका सेवन करना चाहिए। यह शरीर का बढ़ा हुआ वजन तेजी से घटाने में मदद करता है। इससे अतिरिक्त वजन को कम समय में घटाया जा सकता है। यह पोषक तत्वों से भरपूर और आहार फाइबर से भरपूर होने के कारण भूख को शांत करती है। जिससे पेट भरा हुआ महसूस होता है और ज्यादा खाने पर रोक लगती है। इसलिए वजन घटाने के लिए यह आहार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

18) पाचन क्रिया को बढ़ावा

अपच के इलाज के लिए यह उत्कृष्ट जड़ी बूटी है। इसकी जड़ के चूर्ण का उपयोग विरोधी गुण आहार नली में गैस के निर्माण को कम करता है। जिससे सूजन, पेट फूलना आदि समस्याओं को खत्म करता है। यह अपच को भी कम करता है। शरीर में पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण को बढ़ाता है। शतावरी की जड़ के पाउडर में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है। जो कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं के लिए एक अच्छा उपाय है। १ चम्मच जड़ के चूर्ण को गर्म पानी में मिलाएं। इसमें आधा चम्मच शहद मिलाएं इसके सेवन से अपच में आराम होगा।

19) स्तनों का आकार बढ़ाने में

शतावरी में फाइटोएस्ट्रोजेन की भरपूर मात्रा होती है। जिससे स्तन वृद्धि होती है इसके सेवन से महिलाओं के शरीर में वसा ऊतक बढ़ता है। जिससे स्तन का आकार भी बढ़ता है। महिलाएं अपने ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने के लिए शतावरी का सेवन कर सकती है। शतावरी को टेबलेट, चूर्ण, कैप्सूल जूस के रूप में ले सकती हैं।

20) अनिद्रा

जिन लोगों को नींद नहीं आती उन्हें शतावरी चूर्ण का सेवन दूध के साथ करना चाहिए। २ से ४ ग्राम शतावरी चूर्ण को दूध में पका लें। अब इसमें थोड़ा सा घी मिला लें इसे खाएं यह अनिद्रा की बीमारी को खत्म कर देगा।

21) सिर दर्द में

आजकल तनाव भरी जिंदगी में सिर दर्द एक आम समस्या बन गई है। शतावरी सिर दर्द में आराम दिलाता है। शतावर की ताजी जड़ को कूट लें, अब इसका रस निकाल लें। जितना रस है उतना ही तिल का तेल डालकर उबाल लें। इससे अपने सिर पर मालिश करें सिर दर्द ठीक हो जाएगा।

22) स्वप्न दोष का इलाज

स्वप्न दोष की समस्या से राहत पाने के लिए ताजी शतावर की जड़ का चूर्ण बनाएं। इसे २५० ग्राम की मात्रा में लें और इसमें २५० ग्राम मिश्री को मिलाकर पीस लें। अब २५० मिली दूध में इसकी ६ से ११ ग्राम चूर्ण की मात्रा मिला लें। इसका सुबह-शाम सेवन करें। इससे स्वप्न दोष दूर हो जाएगा।

शतावरी के उपयोगी भाग - Useful Parts of Shatavari

  • शतावरी के पत्ते
  • शतावरी की जड़
  • जड़ से तैयार काढ़ा
  • शतावरी चूर्ण
  • पेस्ट

शतावरी का इस्तेमाल कैसे करें? - How to Use Shatavari in Hindi?

इस तरह से शतावरी का उपयोग किया जा सकता है।

  • चूर्ण - ३ से ६ ग्राम
  • रस - १० से २० मिली
  • काढ़ा - ५० से १०० मिली

शतावरी कहां पाया या उगाया जाता है? - Where Is Shatavari Found or Grown?

भारत में विभिन्न स्थाओं पर शतावरी की खेती की जाती है। श्री लंका और पूरे हिमालयी क्षेत्र में भी यह उगता है। हिमालयी क्षेत्रों में १५०० मीटर तक की ऊंचाई पर इसकी खेती होती है। इसकी बेल १ से २ मीटर तक लंबी होती है यह सभी तरह के जंगलों और मैदानी इलाकों में पाई जाती है।

इसके पौधों को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। मध्यप्रदेश के पन्ना में शतावर सारंग मंदिर की पहाडियों से लेकर कालिंजर और काल्दा पठार तक यह प्राकृतिक तरीके से उपजता है जो उच्च मात्रा में मिलता है। शतावरी मुख्य रूप से गंगा के ऊपरी मैदानी क्षेत्रों में और बिहार के पठारी भागों में पाई जाती है।

शतावरी खुराक

एक व्यक्ति द्वारा इसके सप्लीमेंट्स का पाउडर, टैबलेट या इसे तरल रूप में भी खरीदा जा सकता है। यदि आप शतावरी गोलियों का सेवन कर रहे है तो इसकी सामान्य खुराक ५०० मिलीग्राम होना चाहिए। इसे एक दिन में २ बार लिया जा सकता है।

शतावरी अर्क की तरल खुराक को जूस या पानी के साथ एक दिन में ३ बार ले सकते है।

अगर आप शतावरी का सेवन करना चाह रहे है तो डॉक्टर से पूछकर करे।

शतावरी के संभावित दुष्प्रभाव और जोखिम

शतावरी में बहुत से औषधीय गुण पाए जाते है लेकिन कुछ लोगों को इससे हानि हो सकती है इसे सावधानी पूर्वक लेना चाहिए मनुष्यों में शतावरी के जो प्रभाव होते है उनकी जांच कम ही शोधों में हुई है इससे निम्न जोखिम हो सकते है।

  • हृदय गति तेज होना
  • साँस लेने में तकलीफ़
  • चक्कर आना
  • त्वचा और आँखों में खुजली होना
  • स्किन पर सीधे लगा लेने से एलर्जी की समस्‍या
  • दाने या पित्ती होना

अगर आप भी इसका सेवन कर रहे है और इस तरह के लक्षण आपको महसूस हो रहे है तो तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

जो लोग मूत्रवर्धक दवा ले रहे है उन्हें शतावरी का सेवन नहीं करना चाहिए। रक्त शर्करा को कम करने के लिए जो लोग दवाएं ले रहे है उन्हें भी इसके सेवन से बचना चाहिए। शतावरी सप्लीमेंट्स निम्न रक्त शर्करा का कारण बनता है।


निष्कर्ष :

इस तरह महिलाएं और पुरुष शतावरी का सेवन करके विभिन्न लाभ प्राप्त कर सकते है। अगर आप भी ऊपर बताये गई बिमारियों से ग्रसित है तो उनमें शतावरी का सेवन जरूर करें। आपको लाभ होगा आप डॉक्टर से पूछ कर भी इसका सेवन कर सकते है।